सोमवार, 1 मार्च 2010

सूरज को माथे पर बिंदी सा सजाया कीजिये


ख्वाब में मुझको रोज़ बुलाया कीजिये , चैन से रोज़ खुद को सुलाया कीजिये।
एक दफा खुदा से मांग लो मुझको,फिर हर दफा मुझको यूँ ही पाया कीजिये।
आपकी जुल्फें घटायें हैं सावन की, अपने चाँद से मुखरे से घटा हटाया कीजिए।

सूरज आपकी खतिर उगा है लाल, अपने माथे उसको बिंदी सा सजाया कीजिये।
मेरी प्यास बुझती नहीं है पानी से, अपने होठों की नमी उसको पिलाया कीजिये।
मैं डूबना चाहता हूँ गहरे समंदर में, अपनी आँख के सागर में हमें डुबाया कीजिये।
मुझको नज़र आता नहीं कोई तेरे सिवा, हर जगह बस आप नज़र आया कीजिये।
मेरी धड़कने गाती हैं तेरे तराने रात दिन,अपनी धडकनों में मेरे सुर सजाया कीजिये।
मैंने माँगा है खुदा से नेमत में आपको ,आप मुझको भी ईश्वर से मांग लाया कीजिये।
-नीहार

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मुझे कुछ पल तो तुम अपने उधार दे दो,मेरी जिंदगी को एक खूबसूरत उपहार दे दो।
हर तरफ है अँधेरा रौशनी नहीं कहीं , चाँद बन कर तुम मेरे घर रौशनी का विस्तार दे दो।
हर तरफ बियाबान सा मरुभूमि का विस्तार है, तुम उस मरुभूमि को पानी का मीठा फुहार दे दो।
मैं बना चातक यहाँ प्यास जन्मो की लिए हूँ, तुम मुझे सुबह की कलियों पे बिखरी नीहार दे दो।
मैं बिखरा संगीत हूँ एक टूटे हुए इसराज का,तुम संगीत की देवी मुझे एक अटूट सितार दे दो।
जिंदगी में रंग नहीं, गंध नहीं , मकरंद नहीं,तुम आ के मेरी जिंदगी को एक अनूठा श्रृंगार दे दो।
- नीहार