कुछ कही कुछ अनकही
अपने विषय में क्या कहूँ....लिखना मुझे अच्छा लगता है...लिखता हूँ क्यूंकि जीता हूँ...
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Vijuy Ronjan
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शनिवार, 21 जून 2008
सुबह सुबह खिर्कियों पे बैठ चिरियों के गीत सुनो,
सुबह सुबह खिर्कोयों पे बैठ चाय पी के सपने बुनो
सुबह सुबह की हवा को अपने खुशबु से लबरेज़ करो
सुबह सुबह उठ के बैठ सबसे पहले मुझको याद करो.
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