आँखें हैं छल छल,चाहें तुम्हारे साथ के दो पल,
यादों के सिलसिले हैं देखो आए दल बदल।
मुस्कुराना चाहे फितरत ही रही आंखों की मेरी,
किसने देखा उनके अन्दर है भरा कितना ही जल।
मैंने बस यादों में तेरी ही तस्वीर को है घर दिया,
कोई भी तूफ़ान इनको कर ना पाया है बेदखल।
दिल मेरा गाता रहा है गीत तेरे प्यार का हरवक्त,
भ्रमर से लेता रहा वो प्यार की हर धुन सरल।
मैं मुसाफिर तुम मुसाफिर और रास्ते चलते गए,
पांव के छाले भी देखो खिल गए हैं ज्यूँ कमल।
नीहार की दुनिया में बस हर तरफ़ है तेरा ज़माल,
दिल में तेरे ख्यालों से है मची जीवन की हलचल।
अपने विषय में क्या कहूँ....लिखना मुझे अच्छा लगता है...लिखता हूँ क्यूंकि जीता हूँ...
रविवार, 30 नवंबर 2008
रविवार, 23 नवंबर 2008
बुझी बुझी सी रात है ,खोया खोया सा चाँद,
टूट कर बिखरने लगा है मेरे सब्र का हर बाँध।
बादलों में छिप कर क्यूँ नही खेलते हो मुझसे,
हवाओं के परों पे ,क्यूँ नही मुझको हो झुलाते,
न हँसते हो दिन को, न रात तुम हो मुस्काते,
आज कल तुम मेरे गीत क्यूँ नही हो गाते,
सुरह हुआ है मद्धम, ढलने लगी है सांझ.....
बुझी बुझी सी रात है, खोया हुआ है चाँद....
टूट कर बिखरने लगा है मेरे सब्र का हर बाँध।
बादलों में छिप कर क्यूँ नही खेलते हो मुझसे,
हवाओं के परों पे ,क्यूँ नही मुझको हो झुलाते,
न हँसते हो दिन को, न रात तुम हो मुस्काते,
आज कल तुम मेरे गीत क्यूँ नही हो गाते,
सुरह हुआ है मद्धम, ढलने लगी है सांझ.....
बुझी बुझी सी रात है, खोया हुआ है चाँद....
मंगलवार, 28 अक्टूबर 2008
Deepawali ki Shubhkaamnayen
Jalaao diye per rahe dhyaan itna,
andhera dhara per kahin reh na jaaye...
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बुधवार, 15 अक्टूबर 2008
मैंने उसकी जुल्फ में जो उँगलियाँ फेरीं,हाथ खुशबु में मेरे देर तक महकते रहे,
उसकी पलकों को जो चूमा मैंने ऐ दोस्त,हम बिना पिए ही देर तक बहकते रहे।
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उनको अगर भूल जाने को कहोगे मुझसे,तो भला क्यूँ न मैं खुदा को भूलूं,
जी चाहता है हेर वक्त ऐ दोस्त मैं,सिर्फ़ और सिर्फ़ उंनकी यादों में झूलूं।
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रात पलकों पे सितारे सा सजाया उनको,और फिर देर तक उस रौशनी में नहा आए,
जब कहीं लगा की वो दूर हो गए हमसे, हम हवा की तरह जा कर उन्हें छू आए।
उंनके छूने से जी गए पल भर हम , और रात आंखों में सपनो की बारात आयी,
उनके सिरहाने जो फूल रक्खे थे हमने, देर तक उन् फूलों की हमें खुशबु आयी।
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मुझे तुम याद आते हो...
सुबह जब रौशनी छन कर फूलों पे बरसती है,
सुबह ओस की बूंदों में एक शबनम तरपती है,
सुबह जब चिरियों के गले से एक विरह के गीत सुनता हूँ,
मैं अपनी धरकनो में उस वक्त तुम्हारे ख्वाब बुनता हूँ...
मुझे तुम याद आते हो...बहुत तुम याद आते हो॥
दिन की तपती धूप जब मुझको सहलाती है,
बहती हुयी पुरवाई जब मुझे सहलाती है,
किसी पायल की खन खन से जब मुझे कोई बुलाता है,
मधुर संगीत की धुन पर कोई गीत गाता है,
मुझे तुम याद आते हो...अक्सर याद आते हो।
शाम में जब कोई चिरागों को जलाता है,
दिन के थके पखेरुओं को जब कोई लोरी सुनाता है,
जब किसी घुंघरू की खनक से मन को दुलराता है,
चांदनी में गूँथ के कोई तेरी खुशबु ले आता है,
मुझे तुम याद आते हो...बहुत तुम याद आते हो...
उसकी पलकों को जो चूमा मैंने ऐ दोस्त,हम बिना पिए ही देर तक बहकते रहे।
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उनको अगर भूल जाने को कहोगे मुझसे,तो भला क्यूँ न मैं खुदा को भूलूं,
जी चाहता है हेर वक्त ऐ दोस्त मैं,सिर्फ़ और सिर्फ़ उंनकी यादों में झूलूं।
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रात पलकों पे सितारे सा सजाया उनको,और फिर देर तक उस रौशनी में नहा आए,
जब कहीं लगा की वो दूर हो गए हमसे, हम हवा की तरह जा कर उन्हें छू आए।
उंनके छूने से जी गए पल भर हम , और रात आंखों में सपनो की बारात आयी,
उनके सिरहाने जो फूल रक्खे थे हमने, देर तक उन् फूलों की हमें खुशबु आयी।
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मुझे तुम याद आते हो...
सुबह जब रौशनी छन कर फूलों पे बरसती है,
सुबह ओस की बूंदों में एक शबनम तरपती है,
सुबह जब चिरियों के गले से एक विरह के गीत सुनता हूँ,
मैं अपनी धरकनो में उस वक्त तुम्हारे ख्वाब बुनता हूँ...
मुझे तुम याद आते हो...बहुत तुम याद आते हो॥
दिन की तपती धूप जब मुझको सहलाती है,
बहती हुयी पुरवाई जब मुझे सहलाती है,
किसी पायल की खन खन से जब मुझे कोई बुलाता है,
मधुर संगीत की धुन पर कोई गीत गाता है,
मुझे तुम याद आते हो...अक्सर याद आते हो।
शाम में जब कोई चिरागों को जलाता है,
दिन के थके पखेरुओं को जब कोई लोरी सुनाता है,
जब किसी घुंघरू की खनक से मन को दुलराता है,
चांदनी में गूँथ के कोई तेरी खुशबु ले आता है,
मुझे तुम याद आते हो...बहुत तुम याद आते हो...
बुधवार, 1 अक्टूबर 2008
प्रेम कहानी बुन लूँ
कुछ अपनी सुनाऊ मैं ,कुछ तेरी आ सुन लूँ ।
सपने जो बिखरे हैं उनको,पलकों से आ चुन लूँ।
गीत मधुर गाते हैं हम जो लिखते रहते हैं तुम पर,
धरकन से तेरी मैं आ फ़िर कोई नई नवेली धुन लूँ।
रिमझिम रिमझिम सावन रुत में मन खोजे सजन को,
खुली आँख से सपने देखूं , और एक प्रेम कहानी बुन लूँ।
सपने जो बिखरे हैं उनको,पलकों से आ चुन लूँ।
गीत मधुर गाते हैं हम जो लिखते रहते हैं तुम पर,
धरकन से तेरी मैं आ फ़िर कोई नई नवेली धुन लूँ।
रिमझिम रिमझिम सावन रुत में मन खोजे सजन को,
खुली आँख से सपने देखूं , और एक प्रेम कहानी बुन लूँ।
रविवार, 28 सितंबर 2008
मुझपे छाया हुआ तेरा नूर-ऐ-जमाल है
हवाओं से हर वक्त हम तेरा पता पूछते हैं ,
फूलों में हरदम हम तेरी महक ढूंढते हैं।
जो बजती है मन्दिर में घंटियाँ सुबह को,
हम उनमे तेरी चूरियों की खनक ढूंढते हैं।
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अपनी साँसों में बसा कर तुझको,
खुदको मैंने एक नई जिंदगी दी है।
सच कहता हूँ तुझे प्यार कर के मैंने,
सच्चे दिल से खुदा की बंदगी की है।
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हमारा प्यार एक दरिया है,जो दूर तक बस बहता ही जायेगा।
जब बहुत दूर तक वह जायेगा , तो फ़िर समंदर में उतर जायेगा।
***************************************************
हमारा प्यार चंदन का पेर है जो, सबको पवित्र कर जायेगा,
काटने वाले को भी वह,अपनी खुशबु से खूब मेह्कायेगा।
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चुरा लाया हूँ ख़ुद को मैं, पर अपना साया छोर आया हूँ,
तेरी आंखों के समन्दर में मैं अपना चेहरा छोर आया हूँ।
सजा ले मुझको अपनी जुल्फों में,या रख ले दिल की किताब में,
मैं तेरे हाथों में ऐ जान-ऐ-अदा अपने दिल का गुलाब छोर आया हूँ।
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जो तेरा दीदार हो जाए, तो मेरे दिल को करार हो जाए,
तुझ को देखे एक नज़र तो फ़िर,बेचारा चाँद शर्मशार हो जाए।
मेरे चेहरे पे हो तेरी जुल्फ का साया,और तीरगी खुशगवार हो जाए...
चलो फ़िर प्यार हो जाए....चलो फ़िर प्यार हो जाए...
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कुछ दूर हमारे साथ चलो,हम दिल की कहानी कह देंगे,
समझे न जिसे तुम आँखों से,वो बात ज़ुबानी कह देंगे,
फूलों की तरह जब होंठों पे, एक शोख तबस्सुम बिखरेगा,
चुपके से तुम्हारे कानो में, हम हर बात पुरानी कह देंगे।
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मेरी रगों में खून की जगह तेरा खयाल है,
मैं आदमी हूँ या क्या हूँ,ये उठता सवाल है।
हर तरफ़ अँधेरा है, पर मैं सिर्फ़ रौशनी में हूँ,
मुझपे छाया हुआ आपका ये नूर-ऐ-जमाल है।
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फूलों में हरदम हम तेरी महक ढूंढते हैं।
जो बजती है मन्दिर में घंटियाँ सुबह को,
हम उनमे तेरी चूरियों की खनक ढूंढते हैं।
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अपनी साँसों में बसा कर तुझको,
खुदको मैंने एक नई जिंदगी दी है।
सच कहता हूँ तुझे प्यार कर के मैंने,
सच्चे दिल से खुदा की बंदगी की है।
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हमारा प्यार एक दरिया है,जो दूर तक बस बहता ही जायेगा।
जब बहुत दूर तक वह जायेगा , तो फ़िर समंदर में उतर जायेगा।
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हमारा प्यार चंदन का पेर है जो, सबको पवित्र कर जायेगा,
काटने वाले को भी वह,अपनी खुशबु से खूब मेह्कायेगा।
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चुरा लाया हूँ ख़ुद को मैं, पर अपना साया छोर आया हूँ,
तेरी आंखों के समन्दर में मैं अपना चेहरा छोर आया हूँ।
सजा ले मुझको अपनी जुल्फों में,या रख ले दिल की किताब में,
मैं तेरे हाथों में ऐ जान-ऐ-अदा अपने दिल का गुलाब छोर आया हूँ।
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जो तेरा दीदार हो जाए, तो मेरे दिल को करार हो जाए,
तुझ को देखे एक नज़र तो फ़िर,बेचारा चाँद शर्मशार हो जाए।
मेरे चेहरे पे हो तेरी जुल्फ का साया,और तीरगी खुशगवार हो जाए...
चलो फ़िर प्यार हो जाए....चलो फ़िर प्यार हो जाए...
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कुछ दूर हमारे साथ चलो,हम दिल की कहानी कह देंगे,
समझे न जिसे तुम आँखों से,वो बात ज़ुबानी कह देंगे,
फूलों की तरह जब होंठों पे, एक शोख तबस्सुम बिखरेगा,
चुपके से तुम्हारे कानो में, हम हर बात पुरानी कह देंगे।
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मेरी रगों में खून की जगह तेरा खयाल है,
मैं आदमी हूँ या क्या हूँ,ये उठता सवाल है।
हर तरफ़ अँधेरा है, पर मैं सिर्फ़ रौशनी में हूँ,
मुझपे छाया हुआ आपका ये नूर-ऐ-जमाल है।
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शनिवार, 27 सितंबर 2008
नींद को आँख में उतर जाने दो, याद को ख्वाब बन बिखर जाने दो।
खुशबु बन हर वक्त साँसों में महको तुम, गीत बन धड़कनों में बिखर जाने दो।
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आँख में मोती पिरो के रखते हो, मेरी यादों से टूट बिखर जायेगा।
ये मौसम है प्यार का मौसम, यूँ ही ये प्यार में गुजर जायेगा।
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खुदा का जिक्र जब भी आएगा, तू मेरे तस्सवुर में उतर आएगा।
मेरे चेहरे पे तुम जो नज़र डालोगे, वो तुम्हें आईना नज़र आएगा।
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महकी रहे तू सदा चंदन चंदन सी, दिल में मेरे तू रहे सदा बन के स्पंदन सी।
आँख सदा तुझसे मांगे रौशनी की भीख, मुझमें तू हरदम रहे बनके जीवन सी।
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खुशबु बन हर वक्त साँसों में महको तुम, गीत बन धड़कनों में बिखर जाने दो।
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आँख में मोती पिरो के रखते हो, मेरी यादों से टूट बिखर जायेगा।
ये मौसम है प्यार का मौसम, यूँ ही ये प्यार में गुजर जायेगा।
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खुदा का जिक्र जब भी आएगा, तू मेरे तस्सवुर में उतर आएगा।
मेरे चेहरे पे तुम जो नज़र डालोगे, वो तुम्हें आईना नज़र आएगा।
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महकी रहे तू सदा चंदन चंदन सी, दिल में मेरे तू रहे सदा बन के स्पंदन सी।
आँख सदा तुझसे मांगे रौशनी की भीख, मुझमें तू हरदम रहे बनके जीवन सी।
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