बुधवार, 7 जनवरी 2009

नए साल की नयी सुबह का पहला सलाम....तेरे ही नाम...

नए साल की नयी सुबह का पहला सलाम भेजूं,
कोयल की मीठी तान चुरा प्यार का पैगाम भेजूं।
महकती फूल से चुरा कर उस्सकी भीनी सी खुशबु,
हवाओं में उसकी खुशबु घोल बस तेरे ही नाम भेजूं।
गुल भेजूं गुलशन भेजूं और गुल-ऐ-गुलफाम भेजूं,
सागर भेजूं, दरिया भेजूं और जंगल तमाम भेजूं।
नगर भेजूं,क़स्बा भेजूं पूरा का पूरा गाम भेजूं,
सुबह भेजूं,दोपहर भेजूं, मयकश ये शाम भेजूं।
बसंत भेजूं, पावस भेजूं,सावन का जाम भेजूं,
जारे की धुप, गर्मी की बयार,बारिश झमाम भेजूं।
जो भी है मेरे पास वो चीज़ें सर- ऐ-आम भेजूं,
दिल भेजूं, जिगर भेजूं, अपनी साँसे तमाम भेजूं।




मंगलवार, 9 दिसंबर 2008


आँख से जो टपका वो लहू रहा होगा,कतरा कतरा दिल से निकल बहा होगा।
जब दर्द बहुत हुआ होगा हमको, उसने अपनी भीगी पलकों से हमें छुआ होगा।
दूर और दूर कहीं शब् के सन्नाटे में, उसने तकिये को अपनी बाहों में लिया होगा।
याद में मेरी जो भर आयी होंगी आँखें, उन आंसुओं को चुपचाप उसने पिया होगा।
चाँद जब रात को बादलों से निकला होगा,उसने यादों की चादर ओढ़ लिया होगा।
मैं हूँ ,यहीं हूँ और पास ही हूँ उसके, अपने दिल को ये तसल्ली उसने दे दिया होगा।
उसकी रातें कभी वीरान नही होती, उसने ख़ुद को मेरी खुशबु में भिगो दिया होगा।
शज़र उदास होंगे मगर चिरिया नही गुमसुम,मेरे गीत उनको उसने सुना दिया होगा.....
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दर्द की बात नही करता हूँ
मैं दवा बन के उभरता हूँ।
आँख में काजल सा तेरे ,
सुबह शाम मैं संवारता हूँ।
होठों पे अश्क बन फिसलता हूँ,
फ़िर मोतियों सा मैं बिखरता हूँ।
गालों पे तेरे गुलाब की रंगत,
बादलों सा तेरी जुल्फों में उतरता हूँ...
तेरी आंखों से चुरा काजल की लकीर,
रात बन कर मैं ख़ुद ही निखरता हूँ।
तू समंदर की शोखी ले मचलती है,
मैं दरिया हूँ,तुझमे उतरता जाता हूँ....

शनिवार, 6 दिसंबर 2008

कोई तो गीत गाओ की अब चैन पड़े

कोई तो गीत गाओ की अब चैन पड़े,
कोई धुन गुनगुनाओ की अब चैन पड़े.
रास्ते से गुजर नहीं ,राह भी आसान नहीं ,
तुम साथ आओ में तो फिर अब चैन पड़े।
वो झुकी नज़र में तेरे प्यार की खुमारी थी,
उस एहसास को फ़िर ले आओ की अब चैन पड़े।
मुद्दतें हुयी हैं तुम को जी भर के देखे हुए ,
फ़िर आ के दरस दिखाओ की अब चैन पड़े।
वो मेरी साँसों में छुपी खुशबु तेरे प्यार की,
उस खुशबु से मुझे नहलाओ की अब चैन पड़े
खुदा की तलाश में घुमते हैं दर-बा-दर ,
कभी आके मुझे मिल भी जाओ की अब चैन पड़े।

कोई तो गीत गाओ की अब चैन पड़े

बुधवार, 3 दिसंबर 2008

तुझको छू कर जो आती हवा

गुन गुन गुन गुन गाती हवा, कानो में कुछ कह जाती हवा।
तेरी खुशबु तुझ से ही चुरा, फिर उसको मुझ तक ले आती हवा।
हर फूल में हर पत्ते पत्ते में,मुझको तेरी झलक दिखलाती हवा।
मैं खो जाता हूँ यादों में तेरी,तुझमे मेरी याद लिए खो जाती हवा।
जो दिल पे चोट के निसान बने,उनपे मलहम सा बन जाती हवा।
मैं साँसे जो ले लेता हूँ कभी, उनमें तेरी खुशबु ले आती है हवा।
हर पल हर दम तेरी यादों से ,भीतर तक मुझको नहलाती हवा।
ये हवा बनी मेरी खातिर , मेरे हर मर्ज़ की बनी है यही दवा।
तुझको छू कर जो आती हवा,मुझको जीवन वो दे जाती हवा।

रविवार, 30 नवंबर 2008

तुम्हारे साथ के दो पल

आँखें हैं छल छल,चाहें तुम्हारे साथ के दो पल,
यादों के सिलसिले हैं देखो आए दल बदल।
मुस्कुराना चाहे फितरत ही रही आंखों की मेरी,
किसने देखा उनके अन्दर है भरा कितना ही जल।
मैंने बस यादों में तेरी ही तस्वीर को है घर दिया,
कोई भी तूफ़ान इनको कर ना पाया है बेदखल।
दिल मेरा गाता रहा है गीत तेरे प्यार का हरवक्त,
भ्रमर से लेता रहा वो प्यार की हर धुन सरल।
मैं मुसाफिर तुम मुसाफिर और रास्ते चलते गए,
पांव के छाले भी देखो खिल गए हैं ज्यूँ कमल।
नीहार की दुनिया में बस हर तरफ़ है तेरा ज़माल,
दिल में तेरे ख्यालों से है मची जीवन की हलचल।









रविवार, 23 नवंबर 2008

बुझी बुझी सी रात है ,खोया खोया सा चाँद,
टूट कर बिखरने लगा है मेरे सब्र का हर बाँध।
बादलों में छिप कर क्यूँ नही खेलते हो मुझसे,
हवाओं के परों पे ,क्यूँ नही मुझको हो झुलाते,
न हँसते हो दिन को, न रात तुम हो मुस्काते,
आज कल तुम मेरे गीत क्यूँ नही हो गाते,
सुरह हुआ है मद्धम, ढलने लगी है सांझ.....
बुझी बुझी सी रात है, खोया हुआ है चाँद....