यह स्केच मई १९८८ में मैंने बनाया था। इसमें मैंने ब्रम्हा ,विष्णु और महेश तीनो को कर्ता के रूप में प्रतिरूपित कर उसकी कृति को उसी में समाहित कर दर्शाने की कोशिश की है।-निहार, मई १९८८.
अपने विषय में क्या कहूँ....लिखना मुझे अच्छा लगता है...लिखता हूँ क्यूंकि जीता हूँ...
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