यह चित्र वर्ष १९८८ में फुर्सत के उन क्षणों में बनाया गया था जब मेरे लिए ब्रह्मा विष्णु और महेश यानि की पूरी सृस्ती एक आकार में ही समाहित थी..मैंने कोशिश की है, की तीनो प्रमुख देवताओं को सांकेतिक रूप से ही सही यहाँ इस चित्र में ढाल एकाकार कर दूँ...(नीहार, १९८८)

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