शुक्रवार, 11 मार्च 2011

आओ फिर गीत सुनाएँ तुमको....

तुम हो
तुम्हारा ख्याल है ,
और -
चाँद रात है....
जुगनुओं को -
पकड़ने की कोशिश करता ,
मैं -
और मेरे पीछे ,
भागती तुम....
चीड़ों की लम्बी सी कतार,
और -
उसके बीच की,
सर्पीली सी सड़क....
और उसपे -
नंगे पाँव भागते,
हम और तुम....
तुम्हारे होठों को -
चूमती हुयी ,
लचीली गुलमोहर की डाल....
और -
अमलताश के फूलों का,
बिखरा तुम्हारे चेहरे पर-
वो पीला सा गुलाल...
तुम्हारे क़दमों के नीचे ,
बिछा-
जक्रंडा के बैगनी फूलों का,
ख़ूबसूरत गलीचा....
ये मेरा ख्याल है,
या -
बसंत का पदार्पण ...
तुम्हारी साँसों की खुशबु है,
या -
मेरे ही ह्रदय का स्पंदन...
मदमाती सी हवा -
बाजरे की खनक लेकर,
नाच नाच जाती...
मेरी पलकों को ,
तुम्हारे अधरों ने शायद -
चूमा है अभी...
मैं नींद के दरवाज़े ,
ख्वाब की दस्तक सुन रहा।
तुम हो,
तुम्हारा ख्याल है -
और चाँद रात है.....
***************************************
आओ -
फिर गीत सुनाएँ तुमको ...
तेरी पिपनियों को ,
सितार के तार कर लूँ...
और -
अपनी उँगलियों को,
कर लूँ मैं मिजराब...
और फिर ,
बैठ जाएँ-
किसी झील में ,
पाँव दिए हम ....
और फिर,
लहरों में फेंकते रहें -
अपने ख्वाब की धुन।
और फिर,
तरंगों को -
अपनी उँगलियों की पोरों से उठा कर,
डाल दूँ तेरी आँख में -
मैं बेसाख्ता...
और फिर मेरी धुन पे,
रक्स कर उठेंगी -
तेरी आँखों के समंदर में,
लहराती शराब...
एक नशा सा,
छा जायेगा हर शू -
हर तरफ ,
जिंदगी धनक ओढ़ के -
नाच जायेगी...
सच कहता हूँ -
की फिर,
रुखसत नहीं लेगी बहार -
जिंदगी को जिंदगी -
मिल जायेगी।
****************************************
(महादेवी वर्मा से क्षमा याचना समेत)
जो तुम आ जाते एक बार ....
मन हो जाता सागर अथाह,
हो जाती आसान मेरी ये राह,
झंकृत हो जाता मन का सितार,
जो तुम आ जाते एक बार ....
चांदनी सिक्त होती हरेक रात,
दिन ले आता खुशबु की परात,
जीवन में हर पल होती बहार ,
जो तुम आ जाते एक बार...
खिल जाते हर तरफ शतदल कमल,
हिमखंड भी जाता फिर पिघल पिघल,
प्रकृति फिर कर लेती नव श्रृंगार,
जो तुम आ जाते एक बार....
मन हो जाता यमुना का तीर,
पावन हो जाता मेरा ये शारीर,
बाहें हो जाती कदम्ब की डार,
जो तुम आ जाते एक बार...