बुधवार, 2 मार्च 2011

तुम्हारे लिए ...

बादलों से तुम्हारी जुल्फों की खुशबु चुरा रहा,
सांझ को उँगलियों की पोरों से -
तेरी आँख में काजल सा सजा रहा।
ये जो टप टप सी बरसती हैं पानी की बूँदें ,
उनकी धुन पे आवारा मन मेरा ताल दे रहा ।
क्यूँ लगता है यूँ मुझको तुम कह रही मुझसे,
मैं अपने दिल की धडकनों से तेरा हाल ले रहा।
जिस पल मेरी बात से शर्मा सी गयी तुम,
उस पल तेरे चेहरे का मैं गुलाल ले रहा।
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सुबह सुबह चाँद के बुझते ही,
तेरी यादों का मशकबू जलाता हूँ...
और उसके धुएं की खुशबु में,
अपने अज़ाब से निजात पाता हूँ।
तुम्हारी याद है की दिए की लौ सी -
थरथराती रहती है,
और मैं उसे अपनी दोनों पलकों की,
ओट दे बुझने नहीं देता...
ये याद ही है तुम्हारी,
जो मेरे बिस्तर की सलवटों में चस्पां है...
मैं अपने जीस्त की ऊष्मा से -
उस बर्फ को पिघलाता हूँ ...
और फिर मेरी आँखें ,
उफनती दरिया हो जाती।
मेरी यादों में तुम्हारा अक्स और,
मुझे धूप करता तेरे लम्स का खुर्शीद....
हर पल तुम्हारे चाँद से चेहरे को -
अपने हाथों के बीच गुलाब होते देखता हूँ....
हर पल अपने दिल को -
तुम्हारी एक झलक के लिए ,
बेताब होते देखता हूँ।
तुम हो , तुम्हारा ख्याल है और चाँद रात है...
टिमटिमाते सितारे हैं और खुशबु ए जज़्बात है।
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अपने ख्वाब का ताना बना बुन रहा -
पलकों से आँख के मोती चुन रहा....
कुछ गीत लिखे हैं मेरे मन के पटल पर -
आँखें बंद किये मैं उनको सुन रहा।
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तुम हो, तुम्हारा ख्याल है और चाँद रात है...
एक खामोश हवा का दर्द है,
जो बंशी की धुन सा बिखर रहा।
ओस बूंदों से नहाई चन्द्र किरणे,
फूलों के बदन पखार गयीं हैं...
सिहरती रात -
यादों का अलाव जलाये हुए है।
मेरी हथेली पर आँख से टपक कर,
एक अश्रु बूँद मोती हो गया....
आओ तुम्हारी माँग में,
मैं वो मोती सजा दूँ ।
तुम हो , तुम्हारा ख्याल है और ठिठुरती सी रात है...
आँखें हैं,नींद है और बस तुम्हारा ख्वाब है।
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