मंगलवार, 29 जुलाई 2008

बस तुम्हारी याद का ही सहारा है

मैं कहूँ तुमसे की बस तू ही तो हमारा है
सच कहूँ बस तेरी यादों का ही सहारा है ।
दूर तक दिखती नही है आस मिलने की,
कर रहे हैं इन्तेज़ार फूल यहाँ खिलने की,
शाम ढलते ही जल जाते हैं यादों के चिराग,
दिल भी इंतज़ार करता है तड़प कर शाम ढलने की।
सच कहूँ बहती नदी का बस तू ही तो किनारा है,
बीच भंवर में डोलती नाव का बस तू ही सहारा है।
आ भी जाओ की मिल जाए मेरे दिल को करार,
सूने जीवन में हमारे भी आ जाए फिर बहार...