बुधवार, 9 जुलाई 2008

जहाँ मेरे स्वप्न पला करते हैं

मुमकिन है तुम्हें याद आए वो पल
जब मैंने गूंथा था तुम्हारी जुल्फों में बादल,
जब तुम्हारे चेहरे को छू सूरज रोशन हुआ था,
जब तुम्हारी आंखों में लहराया था सागर,
जब तुम्हे सीने से लगा मैंने जिंदगी की साँसे ली,
जब तुम्हारे होंठ से चुरा ली थी अमृत की एक धार,
जब मैंने तुम्हारे सीप सी आंखों में झाँक कर था कहा,
तुम्ही हो.... हाँ तुम्ही तो हो मेरी जिंदगी का प्यार।
तुमसे ही ही सागर,तुमसे ही हवा और आकाश,
तुमसे ही रूप, तुमसे ही रंग, तुमसे ही है हेर तरफ़ बहार...
मेरी आफरीन .....तू है सबसे हसीं...
तू है सबसे अलग ,तू सबसे जुदा ...
तू ही मेरी इबादत ...तू है मेरा खुदा...