शुक्रवार, 8 अगस्त 2008

चलो फ़िर वही गीत गुनगुनाया जाए.....





उनकी पलकों पे सूरज को सजाया जाए ,

सुबह आने को है माहौल बनाया जाए।

नींद खुलते ही उनको बड़े प्यार से,

एक प्याला गरम चाय का पिलाया जाए ।

अपनी रूठी किस्मत को मनाने के लिए,

उनको फ़िर अपने पास बुलाया जाए।

जिंदगी बेशकीमती है ये कहते हैं लोग,

उनकी आँख में जिंदगी को पाया जाए।

उंनकी शान में कई गीत लिखे हैं हमने,

आज उनको ही वो गीत सुनाया जाए।

उनकी साँसों में मोगरे की खुशबु है,

उसकी खुशबु में डूब नहाया जाए।

वोह चाँद है , आसमान में रहता है ,

चलो उन्हें ज़मीन पे उतार लाया जाए,

ज़मीन पे आज कल बहुत अँधेरा है,

उनकी रौशनी से ज़मीन को नहाया जाए।

उनके आने से फूलों पे बहार आती है,

बहार लाने के लिए उनको ही बुलाया जाए।

होंठ चुप हैं आँखें नम हैं उनके अब ,

उनको अपने ही दिल में बसाया जाए।

रात हो गई नींद आ रही है उनको ,

चलो कोई मीठी लोरी सुनाई जाए।......

ख़ुद भी सोया जाए और उनको भी सुलाया जाए....

सुबह होते ही फ़िर उनको जगाया जाए......

चिरियों के मधुर तान से सजा कर....

दिन का आगाज़ कराया जाए...प्यार के दो गीत गुनगुनाया जाए....