मंगलवार, 21 जून 2011

जय जय हे सरकार

जय जय हे सरकार

कुछ सालों मे ही कर डाला देश का बंटाधार।
जय राजा, जय परजा जय जय हे सरकार॥

भाव चढ़े बाज़ार में ऐसे,
सुरसा मुंह खोले हो जैसे,
कुंभकरण की नींद सो रहे,
तुमको है धिक्कार।
जय जय हे सरकार॥

जाति द्वेष को फिर बढ़ाया,
अधर्म का पाठ पढ़ाया,
देश जाये पर कुर्सी न जाये,
यही है तेरा विचार।
जय जय हे सरकार॥

आत्मदाह करत लड़कण सब,
धिक्कारत तुमको बड़कण सब,
तुम तो ले डूबे हो भैया,
हमरी नाव मँझधार।
जय जय हे सरकार॥

कभी दक्षिण कभी वामपंथ हो,
कभी कुरान कभी वेद ग्रंथ हो,
समय देख कर चाल हो चलते,
जैसे कोई मक्कार ।
जय जय हे सरकार॥

धर्म भेद का बोया है काँटा,
देश को है टुकड़ों मे बांटा,
जिस दाल पर बैठे हो भैया,
उसी पे किया प्रहार।
जय जय हे सरकार॥

प्रजा निरीह निर्जीव तंत्र है,
असत्य और हिंसा मूल मंत्र है,
सूचना का अधिकार है लेकिन,
सेंसर हॉत समाचार।
जय जय हे सरकार॥

बहुत हुआ है दूर का दर्शन,
बहुत हुआ है गर्जन तर्जन,
अब तो बंद करो अपना तुम,
सब असत्य प्रचार।
जय जय हे सरकार॥

मस्त मलंग निहार बोले,
गर तुम्हरे दिल मे हो शोले,
मत उसको पानी बनने दो,
बनने दो अंगार।
जय जय हे सरकार॥

-नीहार