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मैं अभी भी अपने व्यक्तित्व की तलाश में भटक रहा हूँ...बचपन से एक निर्बाध झरने सा जंगल पहाड़ों को चीड़ते हुये बहते रहना मुझे हरदम अच्छा लगता था...तितलियों को उड़ते हुये देखता तो मन ललच जाता था उनके पंख चुराने को...कान्हा का मोरपंख मेरे मानस मे सबसे ज्यादा उपयुक्त वस्तु था खुद के शृंगार का...और बंसी की धुन पर राधा का नृत्य मन को उल्लासित करने का सबसे आसान उपाय...आज भी मेरे लिए ये सारे मौजूद हैं...ये हैं मेरी कल्पना में तो मैं हूँ...

मंगलवार, 21 जून 2011

जय जय हे सरकार

जय जय हे सरकार

कुछ सालों मे ही कर डाला देश का बंटाधार।
जय राजा, जय परजा जय जय हे सरकार॥

भाव चढ़े बाज़ार में ऐसे,
सुरसा मुंह खोले हो जैसे,
कुंभकरण की नींद सो रहे,
तुमको है धिक्कार।
जय जय हे सरकार॥

जाति द्वेष को फिर बढ़ाया,
अधर्म का पाठ पढ़ाया,
देश जाये पर कुर्सी न जाये,
यही है तेरा विचार।
जय जय हे सरकार॥

आत्मदाह करत लड़कण सब,
धिक्कारत तुमको बड़कण सब,
तुम तो ले डूबे हो भैया,
हमरी नाव मँझधार।
जय जय हे सरकार॥

कभी दक्षिण कभी वामपंथ हो,
कभी कुरान कभी वेद ग्रंथ हो,
समय देख कर चाल हो चलते,
जैसे कोई मक्कार ।
जय जय हे सरकार॥

धर्म भेद का बोया है काँटा,
देश को है टुकड़ों मे बांटा,
जिस दाल पर बैठे हो भैया,
उसी पे किया प्रहार।
जय जय हे सरकार॥

प्रजा निरीह निर्जीव तंत्र है,
असत्य और हिंसा मूल मंत्र है,
सूचना का अधिकार है लेकिन,
सेंसर हॉत समाचार।
जय जय हे सरकार॥

बहुत हुआ है दूर का दर्शन,
बहुत हुआ है गर्जन तर्जन,
अब तो बंद करो अपना तुम,
सब असत्य प्रचार।
जय जय हे सरकार॥

मस्त मलंग निहार बोले,
गर तुम्हरे दिल मे हो शोले,
मत उसको पानी बनने दो,
बनने दो अंगार।
जय जय हे सरकार॥

-नीहार

9 टिप्पणियाँ:

  1. मत उसको पानी बनने दो,
    बनने दो अंगार।
    जय जय हे सरकार॥
    .......ला-जवाब" जबर्दस्त!!

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  2. जय जय हे सरकार

    कुछ सालों मे ही कर डाला देश का बंटाधार।
    जय राजा, जय परजा जय जय हे सरकार॥

    कुछ साल और टिक गयी तो कर देगी जनता को लाचार
    ऐसी है ये सरकार , ऐसी है ये सरकार

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  3. ऐसी सरकार निसंदेह वंदन योग्य है...जिसे अपनी जनता और देश से सरोकार नहीं...सिर्फ सत्ता की पड़ी हो उन्हें कुछ भी कह लीजिये...थेंथर चमड़ी है...इस असंवेदनहीनता को शत-शत प्रणाम...

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  4. जाति द्वेष को फिर बढ़ाया,
    अधर्म का पाठ पढ़ाया,
    देश जाये पर कुर्सी न जाये,
    यही है तेरा विचार।
    जय जय हे सरकार॥

    बिल्कुल....देश का बंटाधार ही हुआ है...

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  5. इस असंवेदनहीनता को शत-शत प्रणाम|

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  6. बहुत हुआ है दूर का दर्शन,
    बहुत हुआ है गर्जन तर्जन,
    अब तो बंद करो अपना तुम,
    सब असत्य प्रचार।
    जय जय हे सरकार॥

    Bahut Badhiya.... sahi prahar kiya hai aapne ...

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  7. जबरदस्त व्यंग्य मज़ा आ गया पोस्ट पढ़ कर , बधाई

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  8. उम्दा .. लाजवाब... बहुत सुन्दर ...वाह ... जितनी तारीफ करूं कम है... करारा प्रहार किया है. अच्छा लगा .

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