बुधवार, 1 अक्तूबर 2008

प्रेम कहानी बुन लूँ

कुछ अपनी सुनाऊ मैं ,कुछ तेरी आ सुन लूँ ।
सपने जो बिखरे हैं उनको,पलकों से आ चुन लूँ।
गीत मधुर गाते हैं हम जो लिखते रहते हैं तुम पर,
धरकन से तेरी मैं आ फ़िर कोई नई नवेली धुन लूँ।
रिमझिम रिमझिम सावन रुत में मन खोजे सजन को,
खुली आँख से सपने देखूं , और एक प्रेम कहानी बुन लूँ।